विशाल विचार
शेखर सिद्दीकी फतेहपुर की रिपोर्ट

डाक्टर को आज भी भगवान् के रूप मे देखा जाता हैँ, मगर कभी यही डाक्टर मरीज को बचाने के लिए हर प्रयत्न करते थे । मगर आज के दौर मे प्राइवेट नर्सिंग होमो का चलन बढ़ गया । उसके पीछे एक सोच एक मकसद वह सिर्फ पैसा । मरीज भर्ती हुया पैसे कि गिनती चालू हो गयी ।तब तक रोक रखते जब तक वोह आख़री सांसे न ले, बाद मे रिफर इलाज के नाम पर बिल ऐसा बिल जिसको देख घर वालो को गश आ जाए । यही नहीं ज्यादा तीन पांच किया तो डाक्टर से लेकर कर्मचारियो तक मार कूट के लिए आमादा हो जाते।

जनपद के सदर कोतवाली क्षेत्र के सिविल लाइन पत्थर कटा समीप करुणा ज्योति नर्सिंग होम जो अक्सर सुर्खियों मे रहता हैँ । यहाँ इलाज के दौरान मौत और मौत के बाद हंगामा यह पहली बार नहीं। आज फिर इलाज के दौरान मौत ने फिरसे नर्सिंग होम कि परते खोल दिया जनपद बांदा निवासी रणजीत विश्वकर्मा का पुत्र अशोक कुमार जो कि पेट के दर्द से पीड़ित था । आनन फानन मे परिजन करुणा जीवन ज्योति नर्सिंग होम लेकर आये, इलाज हेतु भर्ती कराया ।भर्ती करते समय लम्बी रकम जमा कराई गयी, डाक्टर अमित मिश्रा कि निगरानी मे इलाज चला 24 घंटे बीत जाने के बाद भी मरीज को कोई फायदा नहीं मिला । आपरेशान कि बात कही गयी एक लाख रुपए जमा कराये गए आपरेशान हो गया । रात को मरीज को तकलीफ हुयी चीखा चिल्लाया डाक्टर अमित मिश्रा ने मरीज के साथ अपशब्दों का प्रयोग किया। हालत मे सुधार न होने के कारण मरीज के परिजनों को चंद रुपए देकर कानपुर रिफर कर एक लाख कि धनराशि बाद मे देने कि बात कही । परिजनों से कहा गया जाकर पहले इसका इलाज कराओ. मगर एक बेटे ने रास्ते मे ही अपने परिजनों के सामने दम तोड़ दिया । परिजनों ने जब पैसा मांगा तो बेइज्जत करके भगा दिया गया ।करुणा ज्योति नर्सिंग होम के डाक्टर अमित मिश्रा जिनके खिलाफ सदर कोतवाली मे मामला भी दर्ज हैँ । महीनो जेल मे रहने के बाद जमानत मे चल रहे हैँ । यह कोई पहली मौत नहीं इसके पहले भी मौत हो चुकी, यह पहला नर्सिंग होम नहीं इस तरह के कितने शहर से लेकर गाँव मे नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे है ।आये दिन मौत को लेकर सुर्खियों मे बने रहते हैँ । मगर स्वास्थ्य विभाग के रेहमो करम के चलते फल फूल रहे । कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खाना पूरी देखने को मिलती हैँ.वही रणजीत विश्वकर्मा कि मानी जाय तो उनका कहना हैँ कि मेरे बेटे के पेट मे दर्द था । यहां दिखाने आये डाक्टर ने भर्ती किया पैसे भी जमा करा लिया जब मरीज को कोई राहत नहीं हुई तो ऑपरेशन की बात की। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी तो कानपुर रिफर कर दिया । एक लाख रुपए भी नहीं वापस किया गलत इलाज से मेरे बेटे कि जान गयी,।

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