बारां, राजस्थान: जिले के अटरू उप जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी और मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलने के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में डॉक्टरों के 22 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में कथित तौर पर सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
ताजा मामला एक बीमार महिला से जुड़ा है। आरोप है कि महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उसे समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों में नाराजगी है।
22 स्वीकृत पद, कार्यरत केवल दो डॉक्टर होने का दावा
स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक अटरू उप जिला अस्पताल में कुल 22 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से अधिकांश पद लंबे समय से खाली बताए जा रहे हैं और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं केवल दो डॉक्टरों के भरोसे संचालित होने का दावा किया गया है।
डॉक्टरों की कमी के कारण ओपीडी में मरीजों को लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसके अलावा गंभीर मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलने और दूसरे अस्पतालों में जाने की नौबत आने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
महिला को उपचार नहीं देने का आरोप
अटरू निवासी सूरज ने आरोप लगाया है कि वह एक बीमार महिला को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा था। आरोप के अनुसार, वहां मौजूद नर्सिंगकर्मी हुकुमचंद ने महिला का उपचार करने से इनकार कर दिया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि महिला की हालत खराब होने के बावजूद उसे समय पर चिकित्सा सहायता नहीं दी गई। हालांकि, इस आरोप की अभी तक स्वास्थ्य विभाग अथवा अस्पताल प्रशासन द्वारा आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
ड्यूटी के दौरान डॉक्टर के आराम करने का आरोप
परिजनों ने डॉ. कन्हैयालाल पर भी ड्यूटी के समय आराम करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि अस्पताल में कई मरीज उपचार की उम्मीद में इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें समय पर डॉक्टर की सुविधा नहीं मिली।
आरोप है कि उपचार नहीं मिलने के कारण कुछ मरीजों को बिना इलाज के ही अस्पताल से वापस लौटना पड़ा। इन आरोपों पर संबंधित डॉक्टर अथवा अस्पताल प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
लंबे समय से बनी हुई है डॉक्टरों की कमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों और आवश्यक कर्मचारियों की कमी कोई नई समस्या नहीं है। इस संबंध में पहले भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक रिक्त पदों को भरने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
उप जिला स्तर का अस्पताल होने के कारण अटरू और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सीमित डॉक्टरों और कर्मचारियों के कारण उपलब्ध संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
निष्पक्ष जांच और रिक्त पद भरने की मांग
स्थानीय नागरिकों और मरीज के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए।
- महिला को कथित रूप से इलाज नहीं देने के मामले की निष्पक्ष जांच हो।
- ड्यूटी में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- मरीजों के लिए चौबीस घंटे आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
- अस्पताल की ड्यूटी और उपस्थिति व्यवस्था की नियमित निगरानी हो।
अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष नहीं आया सामने
समाचार लिखे जाने तक अटरू उप जिला अस्पताल प्रशासन या राजस्थान स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।
आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह मरीजों के उपचार और अस्पताल की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। E India News स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता। संबंधित अस्पताल प्रशासन, डॉक्टर या स्वास्थ्य विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा
