नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के दौरान शनिवार को अचानक तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। मौके पर उपस्थित प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पूरी कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही सेकंड के अंदर पुलिस वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से अपने साथ ले गई।
इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने पुलिस पर धक्का-मुक्की करने, वीडियो रिकॉर्डिंग रोकने और कुछ प्रदर्शनकारियों के मोबाइल फोन लेने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, संबंधित समाचार रिपोर्ट में इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत पक्ष शामिल नहीं है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच अचानक पहुंची पुलिस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हुए थे। लोग नारे लगा रहे थे और अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रहे थे। इसी बीच पुलिसकर्मी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और सोनम वांगचुक को वहां से ले जाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
जैसे ही समर्थकों को इसकी जानकारी मिली, वे वांगचुक के पास पहुंच गए। कुछ लोगों ने पुलिस से कार्रवाई रोकने और पहले बातचीत करने की अपील की। महिलाओं और छात्रों सहित कई प्रदर्शनकारियों ने वांगचुक के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाने की कोशिश भी की, लेकिन वे पुलिस की कार्रवाई को रोक नहीं पाए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि लगभग 30 सेकंड के भीतर वांगचुक को वहां से ले जाया गया। अमर उजाला की रिपोर्ट
अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक
रिपोर्ट के मुताबिक, भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को उनके स्वास्थ्य को देखते हुए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई। समर्थकों का कहना था कि प्रशासन को बलपूर्वक हटाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था।
वांगचुक को अस्पताल ले जाने के दौरान प्रदर्शनकारी लगातार उनका नाम लेकर नारे लगाते रहे। कई लोगों ने पूरी कार्रवाई को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड करने का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए मोबाइल छीनने के आरोप
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई का वीडियो बना रहे लोगों को रिकॉर्डिंग बंद करने के लिए कहा। प्रदर्शनकारी रमन के अनुसार, वह अपने मोबाइल से घटनाक्रम रिकॉर्ड कर रहे थे, तभी एक पुलिसकर्मी ने उनसे फोन नीचे करने को कहा और फिर मोबाइल अपने हाथ में ले लिया।
एक महिला प्रदर्शनकारी ने भी आरोप लगाया कि वे केवल मौके की स्थिति रिकॉर्ड करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें पीछे धकेला गया और वीडियो बनाने से रोका गया। कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर सख्ती और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का विस्तृत जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
धक्का-मुक्की में कुछ लोगों को चोट लगने का दावा
प्रदर्शन में शामिल लोगों के मुताबिक, जब समर्थकों ने सोनम वांगचुक को ले जाने का विरोध किया तो पुलिस ने उन्हें पीछे हटाया। इसी दौरान धक्का-मुक्की हुई और कुछ प्रदर्शनकारियों ने चोट लगने का दावा किया।
समर्थकों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था और वे केवल अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठा रहे थे। उन्होंने पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने तथा कथित दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के तरीके को लेकर प्रदर्शनकारी कई सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस को पहले आयोजकों और वांगचुक के समर्थकों से बात करनी चाहिए थी। दूसरी ओर, भूख हड़ताल पर बैठे व्यक्ति की बिगड़ती सेहत की स्थिति में प्रशासन द्वारा चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना भी आवश्यक माना जाता है।
फिलहाल इस घटनाक्रम के बाद सोनम वांगचुक के समर्थकों में नाराजगी है। अब सभी की नजर उनके स्वास्थ्य और दिल्ली पुलिस की ओर से आने वाले आधिकारिक स्पष्टीकरण पर बनी हुई है।
