विशाल विचार- शेखर सिद्दीकी ब्यूरो चीफ फतेहपुर
जनपद के अमौली रेंज वा जहानाबाद थाना क्षेत्र के बुढ़वा गांव में बीते दिनों करीब 180 पेड़ सागौन के लकड़ी माफियाओं द्वारा जमी दोज कर दिए गए इतने बड़े मात्रा में पेड़ों की कटान होती रही । लकड़ी माफिया अपना काम करते रहे और विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ कर चैन की नींद सोते रहे । अगर ग्रामीणों की माने तो ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों ने इसकी जानकारी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को उसके फोन पर दी थी । लेकिन उसे अधिकारी द्वारा यह कहा गया कि ठीक है मैं दिखवाता हूं ,और जांच करवा कर कार्रवाई करता हूं ।आज 2 दिन बीत जाने के बाद भी लकड़ी माफियाओं पर तो कोई कार्यवाही नहीं हुई , लेकिन लकड़ी माफियाओं ने पेड़ों के बचे हुए ठूंठ को उखाड़ कर जमीन बराबर करने का काम जरूर शुरू करवा दिया था । आज फिर जब लोगों ने शिकायत की तो औपचारिकता निभाने के लिए मौके पर वन विभाग के उसी दरोगा को जांच के लिए भेजा गया । जिसकी भूमिका इस काम में खुद संदिग्ध है । बताते चलें कि बुढ़वा गांव में ब्रह्मदेव मंदिर के पीछे करीब सागौन का एक भाग था ।जिसको लकड़ी माफियाओं द्वारा सारे पेड़ों को काटकर हरियाली को नेस्तनाबूद कर दिया गया । हालांकि यह कोई नई बात नहीं है । रोज कहीं ना कहीं कोई ना कोई हरा पेड़ इन लकड़ी माफियाओं द्वारा इलेक्ट्रानिक मशीनों से कटकर लकड़ी रातों-रात ठिकाने लगा दी जाती है । इसमें केवल वन दरोगा ही नहीं बल्कि इतने बड़े काम में वन क्षेत्र अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है क्योंकि जब भी कोई शिकायत की जाती है । तो वन क्षेत्र अधिकारी सिर्फ एक रटा रटाया जवाब देते हैं । कि दिखवाता हूं इसके बाद संबंधित कर्मचारियों को फोन करके लकड़ी माफिया को विभाग द्वारा ही होशियार कर दिया जाता है । की जैसे भी हो रात में लकड़ी उठा लो और कटे हुए पेड़ों के ढूंढ भी गायब कर दो यह खुद विभाग के कर्मचारी उन लकड़ी के ठेकेदारों को आगाह करते हैं। इस सागौन के पेड़ काटने की जानकारी ग्रामीणों द्वारा वन क्षेत्र अधिकारी को भी दी गई थी । लेकिन वन क्षेत्र अधिकारी द्वारा भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई । और ना ही मौके का वन क्षेत्र अधिकारी द्वारा मौका मुआयना किया गया है। जब हमारे संवाददाता ने इस पेड़ों के कटान की जानकारी वन क्षेत्र अधिकारी से उनके फोन द्वारा लेने की कोशिश की तो उन्होंने फोन रिसीव ही नहीं किया । घंटी बजती रही लेकिन वन क्षेत्र अधिकारी द्वारा फोन नहीं उठाया गया । जिससे साबित होता है कि इसमें वन क्षेत्र अधिकारी की भूमिका क्या है । ग्रामीणों में तो यहां तक गाना खुशी होती है कि एक सत्ता पक्ष के एक सफेद पोश का हाथ इन लकड़ी माफिया के सर पर है। इसीलिए कोई भी अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतरा रहा है ।
