NEET पेपर लीक पर CJP का हल्ला बोलNEET पेपर लीक पर CJP का हल्ला बोल

लखनऊ में छात्रों के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरी CJP

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल हुए, जिन्होंने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई।

प्रदर्शन का मुख्य केंद्र लखनऊ का इको गार्डन रहा, जहां बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

पहले अनुमति पर विवाद, बाद में मिली मंजूरी

प्रदर्शन को लेकर शुरुआती दौर में प्रशासन और आयोजकों के बीच अनुमति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। हालांकि बाद में प्रदर्शन के लिए अनुमति मिलने की खबर सामने आई। इसी बीच अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों और युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी।

दिल्ली और पुणे के बाद लखनऊ पहुंचा आंदोलन

CJP द्वारा हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर और पुणे में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। इन आंदोलनों में NEET 2026 पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई थी।

अभिजीत दीपके का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

युवाओं के बीच बढ़ रही CJP की चर्चा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई है। यह समूह शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अभियान चला रहा है। हाल के प्रदर्शनों के बाद संगठन को देशभर के छात्रों और युवाओं का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

  • परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
  • पेपर लीक मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई हो।
  • भर्ती परीक्षाओं में देरी को समाप्त किया जाए।
  • दोषी अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस सुधार लागू किए जाएं।

निष्कर्ष

लखनऊ में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं और छात्रों की उन चिंताओं को सामने लाने का प्रयास माना जा रहा है, जो लंबे समय से परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का स्वरूप और प्रभाव किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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