बारावफात में नहीं निकला जुलूस, मुस्लिम समुदाय करता रहा सिफारिश

पुलिस बल मौके पर तैनात, प्रशासन ने नई परंपरा बनाने से किया इनकार

फतेहपुर
जनपद के जाफरगंज थाना क्षेत्र के नरईचा गांव में बारावफात के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस निकालने की तैयारी कर रहे थे। जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी की टुकड़ी के साथ भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया। हालाँकि दिनभर तनाव की स्थिति बनी रही लेकिन माहौल शांतिपूर्ण बना रहा।

गाँव के लोगों का कहना है कि बारावफात पर जुलूस निकालने की परंपरा लगभग एक दशक पहले से ही प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इस बार मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग आपसी सहमति से जुलूस निकालने की सिफारिश कर रहे थे। भीड़ में मौजूद लोगों ने बताया कि पीस कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि दोनों समुदाय मिलजुलकर सौहार्द्रपूर्ण ढंग से त्यौहार मनाएंगे।

जानकारी के अनुसार, त्योहार से एक दिन पूर्व थाना प्रभारी ने समुदाय के लोगों को स्पष्ट कर दिया था कि वे पूर्व परंपरा के अनुसार केवल नमाज़ अदा कर त्यौहार मनाएँ, लेकिन जुलूस निकालने की अनुमति प्रशासन नहीं देगा। इसके बावजूद शुक्रवार की नमाज़ के बाद कुछ लोगों ने जुलूस निकालने की तैयारी की।

जाफरगंज क्षेत्राधिकारी दुर्गेश दीप मौके पर पहुँचे और लोगों से वार्ता की। उन्होंने दो टूक कहा कि जुलूस पर रोक पहले से लगी है और प्रशासन किसी नई परंपरा की शुरुआत की अनुमति नहीं देगा। दिनभर चली बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला और मायूस होकर समुदाय के लोगों ने त्यौहार न मनाने का ऐलान कर दिया।

मौके पर तहसील बिंदकी से राजस्व विभाग के अफसर भी मौजूद रहे जिनमें तहसीलदार अचिलेश सिंह, राजस्व निरीक्षक रमेश चंद्र मिश्रा, लेखपाल कुलदीप पटेल और अतुल पटेल शामिल थे। प्रशासन ने पूरे मामले पर कड़ी निगरानी बनाए रखी।

स्थानीय निवासी सलमान खान ने बताया कि पिछले वर्ष से गाँव में गणपति कार्यक्रम शुरू किया गया, जबकि इससे पहले कभी गणेश प्रतिमा स्थापित नहीं की गई थी। वहीं भाजपा के वरिष्ठ पूर्व जिला मंत्री बलराम सिंह चौहान ने कहा कि लगभग एक दशक पूर्व शिव मंदिर में दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसका सरदार हुसैन ने विरोध किया था। उसी विवाद के चलते समुदायों में तनाव की स्थिति बनी थी।

जानकारी के अनुसार, उस समय सीओ जाफरगंज निवेश कटियार ने दोनों पक्षों के बीच बैठक कर जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उसी आदेश के तहत इस बार भी प्रशासन ने रोक लगाई।

क्षेत्राधिकारी दुर्गेश दीप ने बताया कि त्यौहार बीते वर्ष की भाँति परंपरागत तरीके से कराया गया है। किसी भी नई परंपरा को शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार का कदम भविष्य में विवाद की जड़ बन सकता है, इसलिए शांति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रोक बरकरार रखी गई है।

शांति और सुरक्षा के बीच त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। प्रशासन ने दावा किया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरती गई और क्षेत्र में लगातार पुलिस बल गश्त करता रहा।


✍️ संवाददाता – सुरेश पटेल जाफरगंज फतेहपुर

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