जनपद सहित पूरे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बीते दिनों रात के सन्नाटे में आसमान पर उड़ते ड्रोन कैमरों ने लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया। सोशल मीडिया पर इनके वीडियो वायरल होते ही अफवाहों का बाजार गर्म हो गया कि कहीं इन ड्रोन से जासूसी तो नहीं की जा रही। कई जगह स्थानीय लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

जांच-पड़ताल के बाद अब प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पता चला है कि ये ड्रोन किसी तरह की रेकी या जासूसी नहीं कर रहे थे, बल्कि नदियों और उनके किनारे बसे गांवों का डिजिटल सर्वे कर रहे थे। यह सर्वे भारत सरकार के भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आदेश पर चलाया जा रहा है। प्रदेश भू-स्थानिक निदेशालय के निदेशक डी.एन. पाठक ने पत्र जारी कर जनता को भरोसा दिलाया है कि ड्रोन सर्वे पूरी तरह सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इधर, मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने सभी थानों को ड्रोन मालिकों की सूची तैयार करने और ड्रोन रजिस्टर बनाने के आदेश दिए हैं। नैथानी ने यह भी साफ किया कि ड्रोन केवल निजी मनोरंजन या अवैध उद्देश्यों के लिए उड़ाए गए तो संबंधित व्यक्ति पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च-स्तरीय बैठक में समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन का दुरुपयोग और अफवाह फैलाना गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बीच अमरोहा जिले में पुलिस ने तीन यूट्यूबर्स को बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर हिरासत में लिया था। हालांकि सत्यापन के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन इस घटना से स्थानीय स्तर पर शक और दहशत और बढ़ गई।

अब जब प्रशासन और सर्वेक्षण विभाग दोनों ने साफ कर दिया है कि रात के समय नदियों और आसपास के इलाकों का ड्रोन सर्वे सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, तो लोगों ने राहत की सांस ली है। ड्रोन सर्वे भविष्य में भी जारी रहेगा, लेकिन यह पूरी तरह नियंत्रित और अधिकृत प्रक्रिया के तहत होगा।

✍️ संवाददाता – शेखर सिद्दीकी, ब्यूरो चीफ फतेहपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *