विशाल विचार-शेखर सिद्दीकी ब्यूरो चीफ फतेहपुर

जहां सरकार बनो और बच्चों को बचाने के लिए करोड़ों रुपए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जमीन पर हरियाली को कायम रखने के लिए वृक्षारोपण करवा कर उनके रखरखाव के लिए तमाम उपाय कर रही है वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार खुद इस हरियाली को उजाड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं मामला है जनपद के जाफरगंज थाना क्षेत्र वा अमौली रेंज के कसियापुर गांव का जहां एक बार फिर हरियाली के दानव दो हरे महुआ के पेड़ों को दिन भर में चट कर गए और वन विभाग व पुलिस उनकी तरफ से आंखों को बंद किए रही अभी बीते दिनों इसी रेंज में 150 सागवान के पेड़ काटकर लकड़ी माफिया हरियाली को उजाड़ दिया था । वही आज फिर इसी अमौली रेंज क्षेत्र में कसियापुर गांव में चवन्नी वर्मा के बाग में दो खड़े लहलाते महुआ के पेड़ों पर इलेक्ट्रानिक मशीनों से वार करते हुए इन महुआ के पेड़ों को काटकर लकड़ी उठा कर ले गए । इन लकड़कतों का यह काम अकेले नहीं होता है । बल्कि इसमें जिम्मेदारों का भी हिस्सा होता है । खाकी अपना हिस्सा लेकर इन लकड़कट्टो को लकड़ी काटने की इजाजत दे देता है । क्योंकि हरे वृक्षों को काटना कानूनी अपराध है । इसलिए यह हरियाली के दानव हर जगह चढ़ावा चढ़ाने के बाद हरे पेड़ों के उजड़ने का करते हैं । और जिम्मेदार मूक दर्शन बनकर देखते रहते हैं । क्योंकि उनका मुंह पहले ही इनके द्वारा बंद कर दिया जाता है । जहां एक तरफ वन विभाग की जिम्मेदारी इस हरियाली को बचाए रखना है । एवं हर वर्ष सरकार वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम चलाती है । वहीं दूसरी तरफ विभागीय जिम्मेदार ही इस हरियाली को खत्म करने पर तुले हुए हैं । अगर ग्रामीणों की माने तो इन लकड़कट्टो के साथ विभागीय अधिकारियों की पूरी सांठ गांठ रहती है । और जिम्मेदारी इनको हर तरह की सुविधा कब पेड़ को काटना है ,कैसे निकाल कर ले जाना है , किस वक्त ले जाना है, यह सब पहले हीबता देते है । अमौली रेंज के वन क्षेत्र अधिकारी विवेकानंद गुप्ता का तो यह हाल है । कि अगर कोई लकड़ी माफिया इनको फोन करें तो तुरंत उठ जाता है । लेकिन अगर कोई ग्रामीण या जिम्मेदार नागरिक इनको पेड़ों की कटाई की सूचना देने के लिए फोन करता है तो फोन उठाता नहीं । अगर लोगों की वह ग्रामीणों की माने तो इस क्षेत्र की हरियाली को नष्ट करने में वन क्षेत्र अधिकारी विवेकानंद गुप्ता की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है।

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