विशाल विचार
शेखर सिद्दीकी ब्यूरो चीफ फतेहपुर

साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी रहे मौजूद

करबला के शहीदों को पुरसा देने के लिए सारा दिन होता रहा मातम और सीना ज़नी लबों पर या हुसैन की गूंजती रहीं सदाएं लब्बैक या हुसैन के नारों से गूंज उठा बिसौना सादात सारा दिन चला नौहा ख्वानी का दौर इस मौके पर बिसौना सादात के मोमनीन की तरफ़ से नज़रे इमाम का इंतेज़ाम भी किया गया था जिसमें आए हुये सभी अज़ादारों के लिए खाने का एहतमाम किया गया था । और चाय नाश्ते का बेहतरीन इंतेज़ाम था । जुलूस-ए – अरबईन में अलम, ताबूत,और ज़ुल्ज़नाह की ज़ियारत के लिए हजारों हुसैनी अज़ादारों का हुजूम लगा रहा जमना से सटा हुआ हज़रत अब्बास का बना रौज़ा करबला की याद दिला रहा था हज़ारों की भीड़ हज़रत अब्बास की दरगाह के सामने सर झुका कर सलाम कर रही थी ये वो बहादर अब्बास थे जो इमाम हुसैन के वफ़ादार भाई थे जिनको देख कर ही यजीदियों के पसीने छूट जाते थे कई वर्षों से हो रहे जुलूस ए अरबईन इस वर्ष भी जमना किनारे बने इमाम बारगाह जदीद बिसौना सादात में किया गया जिसमें करबला की शहादत पर मजलिस का आग़ाज़ हुआ मुंबई से आए हुवे हिंदुस्तान के मशहूर मौलाना शाहिद हसन रिज़वी ने करबला की उस जंग का ज़िक्र किया जिसे आज चौदह सौ साल बाद भी दुनिया भुला न सकी करबला की जंग एक ऐसी जंग थी जो किसी हिन्दू भाइयों से नहीं थी उस जंग में मुसलमान इधर भी थे मुसलमान उधर भी थे हाफ़िज़ और क़ारी इधर भी थे और उधर भी थे फर्क इतना था कि इमाम हुसैन और उनके साथी अल्लाह के दीन की हिफाजत कर रहे थे जिस दीन के ज़रिए मोहम्मद साहब ने इस्लाम को कायम किया था और यजीदी मुसलमान वो थे जो इस्लाम के बनाए हुवे उसूलों पर नहीं चल रहे थे यजीद हर वो काम करता था जो इस्लाम में जायज़ न था शराब इस्लाम में हराम है लेकिन यजीद शराब को हराम नहीं समझता था शराब पीता था अब सवाल ये उठता है कि यजीद इमाम हुसैन से बयत क्यों लेना चाहता था क्यों की हुसैन रसूल अल्लाह के नवासे थे वो चाहता था कि अगर इमाम हुसैन मेरे हराम कामों पर मुहर लगा देंगे तो फिर मुझे कोई गलत न कहेगा यही वजह थी यजीद ने इमाम हुसैन पर इतने अत्याचार किए इतने सितम ढाए जिससे हुसैन बयत कर लें लेकिन हुसैन रसूल अल्लाह के नवासे थे हज़रत अली के बेटे थे फातमा के जिगर का टुकड़ा थे तीन दिनों तक भूखे प्यासे रहे फिर भी हक़ पर डटे रहे अपने बहत्तर साथियों की कुर्बानी पेश कर के अपने नाना के दीन को बचा लिया और यजीद को कयामत तक के लिए मुर्दाबाद कर दिया
इस मौके प्रयाग राज की अंजुमन हाशिमिया,अंजुमन हैदरी नौगांवा सादात, सुल्तानपुर मनियारपुर की अंजुमन हैदरिया कदीम, मुज़फ्फरनगर की अंजुमन दुआये जहरा के मशहूर नोहा खान शबी अब्बास अर्फ़ी ने करबला के शहीदों को पुरसा पेश किया और बेहतरीन कलाम पेश करते हुवे अगले साल तक के लिए अपने शहीद इमाम हुसैन को रुखसत किया इस मौके पर मज़हर अब्बास ने बिसौना सादात के मोमनीन की तरफ़ से आए हुवे अज़ादारों एवं पुलिस प्रशाशन का आभार व्यक्त किया

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