साढ़ थाना क्षेत्र के चिरली गांव का मामला…….

     भीतरगांव। जनपद कानपुर नगर के साढ़ थाना क्षेत्र के चिरली गाव निवासी ब्रजेश सिंह परिहार फौज मे तैनात थे उसी समय कनौंज निवासी अंशुल सिंह को उनकी धोखे मिस काल चली गयी बस यही से दोनो मे बात चीत सुरू हो गयी और धीरे धीरे मामला प्यार तक पहुंच गया आपस मे सम्बंध बनने के बाद अंशुल ने कंनौज मे ही ब्रजेश सिंह के विरुद्ध ३७६ का मुकदमा दर्ज करा दिया जिससे ब्रजेश और अंशुल ने आपस मे बैठ कर समझौता करते हुए दोनो आर्य समाज मंन्दिर मेस्टन रोड कानपुर से विवाह कर लिया जिसमे ब्रजेश के घर से कोई सम्लित नही हुआ।
        शादी के बाद ब्रजेश अपने तैनाती स्थल मे अंशुल (बदला हुआ नाम )को रखने लगा परंतु कुछ दिन बाद ही दोनो मे आपस मे विवाद शुरू हो गया |  एक दिन वह आर्मी क्वाटर शिकंदराबाद से बिना पति को बताए घर खुला छोड़ के निकल आयी, जाने की सूचना ब्रजेश ने कमांडिंग ऑफिसर को लिखित रूप से दी और कंनौज आकर सिवल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट मे ब्रजेश सहित पूरे परिवार व रिस्तेदारों को फंसाते हुए एक मुकदमा डाला जिसमे विवेचक ने ब्रजेश को छोड़ कर सभी के नाम हटा दिए विवेचक का कहना था कि जब अंशुल आज तक सशुराल गयी ही नही तो अन्य लोग आरोपी कैसे बन सकते है जिसके बाद ब्रजेश के अनुसार दो लाख रुपए लेकर उस मुकदमा की पैरवी बंद कर दी जिसके बाद मुकदमा अदम पैरवी मे खारिज हो गया जिसके बाद मुअसं ०९२२/२३ मे फिर एक मुकदमा कनौज कोतवाली से डाला जिसमे मार पीट आदि मुकदमा दर्ज कराया जिसमे एक बार फिर रुपए लेकर समझौता किया उसके कुछ दिन बाद पुन: कनौज कोतवाली से अस्पताल के पास मार पीट का मुकदमा डाला जिसमे ब्रजेश तीनो भाई और पिता को आरोपी बनाया परंतु वह मुकदमा भी अदम पैरवी मे खारिज हो गया।

   जिसके बाद ब्रजेश सिंह परिहार कई मुकदमा आदि झेलने के बाद फौज से २०२३ मे स्वैछिक सेवा निव्रत ले लिया जिसके बाद ब्रजेश सिंह ने प्रमुख पारिवारिक न्यायाधीश कानपुर देहात के यहां एक वांद डाला जो अभी तक लम्बित है जिसमे ब्रजेश ने प्रतिवादी नम्बर एक अंशुल सिंह व प्रतिवादी नम्बर दो प्रमोद कुमार यादव पुत्र गंगा सिंह निवासी नगला गरहा पोस्ट पुरे कलान जनपद एटा को बनाया है जो बर्तमान मे आर्मी मे कार्यरत है जिसमे ब्रजेश के द्वारा अंशुल पर कई प्रकार के आरोप लगाए गए है जिसमे दोनो पुत्रियों के विषय मे भी बताया गया है कि पुत्रियाँ कब पैदा हुई यह हमे आज तक नही मालूम है और अंशुल हमसे आज तक लगभग चार लाख पचास हजार रुपए ले चुकी है और रिटायर मेंट के बाद पुन: रुपयों की मांग कर रही है इसी के चलते हमारा पूरा परिवार घर छोड़ कर इधर उधर मारा मारा फिर रहा है और अंशुल लगभग पंद्रह दिनों से गांव मे हमारे घर के बरामदा मे डेरा डाले पड़ी है जब कि मुकदमा पंजीकृत है जिसमे बराबर तारीख पड़ रही है न्यायालय का जो भी फैसला होगा वह हम मानने को तैयार है परंतु अंशुल बीस लाख रुपए की मांग कर रही है और गांव पड़ोश मे हमारे घर की बदनामी कर रही है।

अंकुर शुक्ल ‘विशाल’

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