संवाददाता -सुमन कुमार दत्ता (विशाल विचार )
पाकुड़ जिला विशेष :-
पाकुड़:- पाकुड़ जिले में फर्जी आधार कार्ड बनाने का अवैध कारोबार जोरों पर चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ दलालों द्वारा दूसरे राज्यों से UCL (Update Client Lite) ID प्राप्त कर अवैध रूप से आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। ये कार्य मुख्यतः पाकुड़ जिले के कुछ ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहा है, जहाँ पर बाहरी राज्यों से आए प्रवासियों को बसाने की कोशिश की जा रही है।जानकारी के मुताबिक, दलालों का यह गिरोह अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें स्थानीय नागरिक के रूप में दर्ज कराने का काम कर रहा है। इससे न केवल जिले की जनसांख्यिकी में बदलाव की आशंका है, बल्कि यह मामला राज्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा खेल कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में चल रहा है, जिसके कारण प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस पर जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो पाकुड़ जिला और आसपास के इलाके अवैध जनसंख्या विस्तार और पहचान फर्जीवाड़े के केंद्र बन सकते हैं।
अब सवाल उठता है :-— आखिर किन लोगों के संरक्षण में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है, और कब तक झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था इस खतरे को नजरअंदाज करती रहेगी?पाकुड़। जिले में फर्जी आधार कार्ड बनाने का अवैध कारोबार जोरों पर चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ दलालों द्वारा दूसरे राज्यों से UCL (Update Client Lite) ID प्राप्त कर अवैध रूप से आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। ये कार्य मुख्यतः पाकुड़ जिले के कुछ ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहा है, जहाँ पर बाहरी राज्यों से आए प्रवासियों को बसाने की कोशिश की जा रही है।जानकारी के मुताबिक, दलालों का यह गिरोह अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें स्थानीय नागरिक के रूप में दर्ज कराने का काम कर रहा है। इससे न केवल जिले की जनसांख्यिकी में बदलाव की आशंका है, बल्कि यह मामला राज्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा खेल कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में चल रहा है, जिसके कारण प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस पर जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो पाकुड़ जिला और आसपास के इलाके अवैध जनसंख्या विस्तार और पहचान फर्जीवाड़े के केंद्र बन सकते हैं।अब सवाल उठता है — आखिर किन लोगों के संरक्षण में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है, और कब तक झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था इस खतरे को नजरअंदाज करती रहेगी?
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