ईरान में पिछले करीब दो सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 10,000 से अधिक व्यक्ति हिरासत में लिए गए हैं और 500 से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि मानवाधिकार समूहों द्वारा की गई है। यह मौजूदा संकट महंगाई, आर्थिक ऊँचाई, और राजनीतिक असंतोष के कारण शुरू हुआ — लेकिन अब यह बड़े पैमाने पर सत्तारुढ़ शासन और जनता के बीच टकराव में बदल चुका है।
🇮🇷 विरोध प्रदर्शन कब और क्यों शुरू हुए?
- विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को महंगाई, मुद्रा गिरावट और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए और जल्दी ही देशव्यापी राजनीतिक असंतोष में बदल गए।
- विरोधकारी शहरों की संख्या बढ़कर लगभग 200 से ज़्यादा हो चुकी है, जिससे देश भर में भारी भड़की हिंसा और संघर्ष देखने को मिला है।
हिरासत और मौतों का आंकड़ा
10,000+ लोग अब तक हिरासत में लिए जा चुके हैं — मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कुल पटाक्षेप 10,600 से भी ऊपर हो सकता है।
HRANA मानवाधिकार समूह की रिपोर्ट के मुताबिक विरोध प्रदर्शन में अब तक 500 से अधिक लोगों की मौतें दर्ज हुई हैं।
इन मौतों में प्रदर्शकारी और सुरक्षाबलों दोनों शामिल हैं।
📵 सरकार का कड़ा रुख और इंटरनेट ब्लैकआउट
ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों के फैलाव और दुनिया भर तक सूचनाओं के जाने को रोकने के लिए:
- देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट
- फ़ोन नेटवर्क बंदजैसी कड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अपनाई है, जिससे वास्तविक स्थिति बाहर से जाँचना मुश्किल हो गया है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
विभिन्न देशों और नेताओं ने ईरान की कार्रवाई की निंदा की है:
- जर्मनी के चांसलर ने ईरानी अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं को कमज़ोरी का संकेत बताया।
- संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों ने हिंसा विराम और शांतिपूर्ण संवाद की अपील की है।
- अमेरिका भी इस संकट पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है और संभावित योजना विकल्पों पर विचार कर रहा है।
👥 लोगों की प्रतिक्रिया और हालात
प्रदर्शनों का दायरा केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा:
- इसमें युवा, छात्र, और महिलाओं की भारी भागीदारी रही है।
- सरकार विरोधी नारे और राजनीतिक सुधारों की मांगें तेज़ हो चुकी हैं।

