लाखों रूपये मूल्य की पशु दवाएं हर महीने झोलाछाप डॉक्टरों को! बड़ा घोटाला उजागर – अब पत्रकार करेंगे सवाल जवाब
विशाल विचार ब्यूरो रिपोर्ट | देशभर से विशेष रिपोर्ट
देश के विभिन्न जिलों में पशु चिकित्सा विभाग में लाखों रुपये मूल्य की दवाओं के वितरण में बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर महीने शासन से गौशालाओं और पशु अस्पतालों के लिए भारी मात्रा में दवाएं भेजी जाती हैं, लेकिन इनका वास्तविक उपयोग संदिग्ध है।
सूत्रों के अनुसार, कई स्थानों पर झोलाछाप डॉक्टरों को ही सरकारी दवाएं दी जा रही हैं, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। इस मामले को लेकर “विशाल विचार” ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत सभी संवाददाताओं को अपने क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी (VAO) और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) से सवाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
🔍 संवाददाताओं के लिए पूछे जाने वाले मुख्य सवाल:
- आपके क्षेत्र में कुल कितनी गौशालाएं हैं और उनमें कितने गौवंश मौजूद हैं?
- प्रतिमाह कितने रुपये की दवा खर्च दिखाई जाती है?
- पशु अस्पताल में कुल कितने लोग कार्यरत हैं?
- आपके होते हुए क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर कैसे सक्रिय हैं?
- क्या उन्हें गौशालाओं में इलाज के लिए अधिकृत किया गया है?
- इतना धन और दवा उपलब्ध होने के बाद भी गौशालाओं में गौवंशों की हालत खराब क्यों है?
- दवा वितरण रजिस्टर दिखाएं — जिसमें दवाओं का वास्तविक वितरण दर्ज हो।
⚠️ पत्रकारों के लिए चेतावनी:
सूत्रों के अनुसार, जांच रोकने या खबर दबाने के लिए कुछ अधिकारी या बिचौलिए पैसे का प्रलोभन भी दे सकते हैं। “विशाल विचार” ने सभी संवाददाताओं से अपील की है कि किसी भी स्थिति में ईमानदारी से कार्य करें और इस अभियान को हर हाल में कवर करें।
📢 ब्यूरो चीफ के लिए निर्देश:
ब्यूरो चीफ अपने-अपने जिलों में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) से भी यही सवाल पूछें और उनकी प्रतिक्रिया कैमरे पर रिकॉर्ड करें। यह अभियान पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने के लिए है।
🧭 निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ सरकारी धन के दुरुपयोग का नहीं बल्कि गौसेवा के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार का भी गंभीर उदाहरण है। जब शासन लाखों रुपये गौशालाओं और दवाओं पर खर्च कर रहा है, तो सवाल उठता है कि गौवंश अब भी बीमार और भूखे क्यों हैं?
