विशाल विचार / शेखर सिद्दीकी, ब्यूरो चीफ फतेहपुर

इस्लामी इतिहास और तसव्वुफ़ की रूहानी दुनिया में हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह का नाम एक ऐसे बुज़ुर्ग वली के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने अपने इल्म, अमल और करमात से इंसानियत को रौशन किया। हर साल इस महान सूफी संत की याद में मनाई जाने वाली “ग्यारहवीं शरीफ” पर अकीदतमंदों ने अकीदत के फूल पेश किए और उनकी शिक्षाओं पर अमल करने का पैग़ाम दिया। शैख़ अब्दुल क़ादिर जिलानी का जन्म 17 मार्च 1078 ईस्वी (1 रमज़ान 470 हिजरी) को ईरान के गीलान शहर में हुआ। आप का नसब हज़रत इमाम हसन और इमाम हुसैन दोनों से जुड़ता है — यानी आप हज़रत मुहम्मद ﷺ के नसीबी वंशज हैं। इसी वजह से आपको “गौस-ए-आज़म” यानी मददगार-ए-आलम के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि बचपन से ही आप पर रूहानियत के असार ज़ाहिर थे। दुनियावी खेल-कूद से दूर रहकर आप इबादत और इल्म की तरफ़ मुतवज्जे रहे। आपने बग़दाद जाकर मशहूर उलेमा से तालीम हासिल की और फिर इल्म, तसव्वुफ़ और इंसानियत की ख़िदमत को अपना मक़सद बनाया। करीब 25 वर्षों तक आपने इराक़ के रेगिस्तानों में इबादत और रियाज़त की, जिसके बाद आप बग़दाद लौटे और वहां एक बड़ा मदरस-ए-कादिरिया क़ायम किया। आपके वाज़-ओ-नसीहत से हज़ारों लोग प्रभावित हुए। लोग दूर-दूर से आपके पास इल्म और रूहानी तालीम हासिल करने आते। शैख़ अब्दुल क़ादिर जिलानी ने कई मशहूर किताबें लिखीं जिनमें —
“अल-फ़त्हुर्रब्बानी”, “फ़ुतूहुल-ग़ैब”, “जिला-उल-ख़ातिर”, “बहजतुल-असरार” जैसी किताबें शामिल हैं। इन किताबों में तसव्वुफ़, इंसानियत और रूहानी तरक़्क़ी के रास्ते बयान किए गए हैं। उनकी शायरी और फ़ारसी कलाम में भी रूहानियत की झलक मिलती है। उन्होंने अपने तख़ल्लुस “मुही” से शेर कहे, जिनमें इश्क़-ए-इलाही और तौहीद का पैग़ाम झलकता है। आप एक सुन्नी हंबली प्रचारक, वक्त, तपस्वी, रहस्यवादी, न्यायवादी और धर्म विज्ञानी थे। आप मसलक कादरिया के नामांकित संस्थापक होने के लिए जाने जाते हैं । जो सुनी सूफीवाद का आध्यात्मिक क्रम है ।
आपका विसाल 12 जनवरी 1166 ईस्वी (8 रबीउल अव्वल 561 हिजरी) को बग़दाद में हुआ। आपकी मज़ार आज भी दुनिया भर के मुसलमानों की अकीदत का मरकज़ है। ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर अकीदतमंद फातिहा, कुरआनख़्वानी, नात-ओ-मनक़बत और लंगर का एहतमाम करते हैं। यह दिन न सिर्फ़ एक रूहानी पर्व है बल्कि इंसानियत, मोहब्बत और अमन का पैग़ाम देने वाला दिन भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *