इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व आयुक्त ललित मोदी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी गई है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक आदेश दिया था , जिसमें कि उनको न्यायपालिका के विरुद्ध की गई टिप्पणियों के लिए सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार-पत्रों के माध्यम से माफी माँगनी थी। मोदी के द्वारा दायर हलफनामे का संज्ञान न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति सी.टी.रवि कुमार की पीठ द्वारा लिया गया। हलफनामे में मोदी द्वारा लिखा गया है कि वह आगे से ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे कि भारतीय न्यायपालिका और किसी भी न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुँचे। इसका जवाब देते हुए पीठ ने कहा कि हम हलफनामे की माफी को स्वीकार करते हैं। साथ ही पीठ ने कहा कि ललित मोदी को यह याद रखना होगा कि भविष्य में अगर इस प्रकार की कोई भी गतिविधि ललित मोदी द्वारा की जाती है , जिससे कि न्यायपालिका की अवमानना हो तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। ललित मोदी की माफी के लिए पीठ ने कहा कि हम बिना शर्त माफी को खुले दिल से स्वीकार करते हैं क्योंकि हम माफ करने में विश्वास करते हैं। माफी अगर बिना शर्त , साफ दिल से माँगी गई हो तो शिकार करना चाहिए। पीठ ने साथ ही कहा कि हम इस कार्रवाई को बंद कर रहे हैं। हमें सभी का सम्मान करना चाहिए और हमारी यही एक चिंता है। इससे पहले 13 अप्रैल को न्यायालय ने ललित मोदी को न्यायपालिका के खिलाफ अवमानना की टिप्पणी के लिए फटकार लगाई थी और कहा था कि इस प्रकार की हरकत के लिए गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और इसके लिए निर्देश देते हुए उन्हें सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में माफी माँगने के लिए कहा गया था। साथ ही हलफनामा दायर करने के लिए भी कहा गया था , जिसमें कि भविष्य में ऐसी हरकत न करने की शपथ लेने की बात भी शामिल थी।

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