मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में रक्षा अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया जिसमें की मेजर राकेश टीआर को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया और सेना व पैरामिलिट्री के अन्य लोगों को भी सम्मानित किया गया। मेजर राकेश टीआर वर्तमान में स्पेशल फोर्स की पैराशूट रेजीमेंट में 9 वीं बटालियन में तैनात हैं। 24 अप्रैल 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए जम्मू कश्मीर जाने वाले थे। उसी दौरान इंटेलीजेंस को फिदायीन हमले जैसी सूचनाएँ प्राप्त हुई थीं। यह सूचना मिलते ही मेजर राकेश टीआर अपनी टीम के साथ घटना स्थल की ओर रवाना हो गए। उन्होंने आतंकवादियों को पकड़ने के लिए ड्रोन आदि का इस्तेमाल किया तथा घेराबंदी करने की योजना बनाकर कार्यवाही शुरू कर दी। इसी दौरान आतंकवादियों ने राकेश टीआर की टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी। मेजर राकेश ने अपनी टीम को आदेश दिया और जवाबी कार्यवाही करते हुए आतंकियों को ढेर कर दिया। इस फिदायीन हमले को नाकाम करने के लिए ही मेजर राकेश टीआर को असाधारण साहस और सामरिक युद्ध कौशल के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। रक्षा अलंकरण समारोह के अंतर्गत वीरता पुरस्कार वितरण का आयोजन राष्ट्रपति भवन में किया गया। मेजर राकेश टीआर के अलावा राष्ट्रपति ने जम्मू कश्मीर राइफल्स की तीसरी बटालियन की राष्ट्रीय रायफल्स यूनिट में तैनात लांस नायक विकास चौधरी को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया। लांस नायक विकास चौधरी ने भी जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में असाधारण साहस का परिचय देते हुए आतंकवादियों को ढेर किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन राष्ट्रीय रायफल्स के कैप्टन ( वर्तमान मेजर ) अरुण कुमार को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया। उन्होंने बांदीपोर में बहादुरी दिखाते हुए आतंकवादियों का सफाया किया था। राष्ट्रपति ने बख्तरबंद 55 वीं बटालियन के राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात नायक देवेंद्र प्रताप सिंह को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में एक ऑपरेशन के दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराया था।

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