
पिछले दिनों में कर्नाटक सरकार ने मुस्लिम वर्ग के लिए निर्धारित 4% आरक्षण को खत्म कर दिया था। इसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर की गईं। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होनी है। इस सुनवाई में राज्य सरकार के जबाव का इन्तज़ार है , जबाव के लिए शीर्ष अदालत द्वारा विशेष रूप से आदेशित किया गया था। पिछली सुनवाई में 13 अप्रैल को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया था कि स्तिथि के अनुसार विधिवत उत्तर दिया जाएगा और आदेश को अगली सुनवाई तक कार्यान्वित नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान उचित उत्तर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा विधानसभा चुनाव की उद्घोषणा से दो दिन पहले मुस्लिमों के 4% आरक्षण को खत्म करने के आदेश के विपरीत सरकार को फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति केएम जोसेफ व न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए गये तथ्यों को देखते हुए सरकार से कहा कि आपका निर्णय भ्रामक प्रतीत हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि हम आरक्षण खत्म करने के निर्णय पर रोक नहीं लगाने वाले। इसी बीच सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आदेश में सुनवाई तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस मामले में बेल्लारी के एक मुस्लिम व्यक्ति ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सरकार से कहा था कि आपका यह निर्णय “त्रुटियुक्त व अस्थिर” है। यह गलत धारणाओं से प्रेरित भी लगता है। न्यायलय ने सॉलिसीटर जनरल से कहा कि सरकार के इस निर्णय की नींव कमजोर है। आदेश पारित करने की इतनी जल्दी क्या थी ? सरकार विश्लेषित रिपोर्ट का इंतजार भी तो कर सकती थी।
