लखनऊ विश्वविद्यालय में स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ने और विरोध प्रदर्शन के मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 13 छात्रों को नोटिस जारी किया गया है और प्रत्येक से 50-50 हजार रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया है।
क्या है पूरा मामला
विश्वविद्यालय परिसर की ऐतिहासिक इमारत लाल बारादरी को जर्जर और असुरक्षित बताते हुए प्रशासन ने कुछ समय पहले सील कर दिया था। यह परिसर में स्थित छोटी मस्जिद तक जाने का मार्ग भी प्रभावित करता है, जहां वर्षों से छात्र नमाज अदा करते रहे हैं।
छात्रों का आरोप है कि रमज़ान के दौरान धार्मिक स्थल तक पहुंच रोक दी गई, जिसके विरोध में कुछ छात्रों ने लाल बारादरी के बाहर नमाज पढ़ी और प्रदर्शन किया।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार:
13 छात्रों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी
प्रत्येक छात्र से ₹50,000 का निजी मुचलका
दो जमानतदार प्रस्तुत करने का आदेश
एक वर्ष तक शांति बनाए रखने की शर्त
पुलिस का कहना है कि छात्रों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और निर्माण/सुरक्षा कार्य में बाधा डाली, जिससे परिसर का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी।
छात्रों और संगठनों का पक्ष
मुस्लिम छात्र संगठनों और कुछ अन्य छात्र समूहों का कहना है कि:
नमाज पढ़ना धार्मिक अधिकार है
मस्जिद तक पहुंच रोकना अनुचित है
कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है
कुछ छात्र संगठनों ने नमाज के दौरान मानव-श्रृंखला बनाकर समर्थन भी दिया था।
लाल बारादरी का ऐतिहासिक महत्व
लाल बारादरी नवाबी काल की एक पुरानी संरचना है, जो विश्वविद्यालय परिसर की विरासत इमारतों में गिनी जाती है। वर्षों से यहां स्थित मस्जिद में छात्र नमाज पढ़ते रहे हैं। हाल में भवन की संरचनात्मक कमजोरी के कारण इसे बंद किया गया।
वर्तमान स्थिति
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भवन की सुरक्षा और छात्रों की जान-माल की रक्षा के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। वहीं छात्र संगठन धार्मिक स्वतंत्रता और पहुंच बहाली की मांग कर रहे हैं।
यह मामला फिलहाल प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर विचाराधीन है और परिसर में पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है।
(News Desk)
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