विशाल विचार ब्यूरो यूपी-निर्मित द्विवेदी

फतेहपुर। खजुहा की ऐतिहासिक लीला वैसे तो विजय दशमी के दिन से गणेश पूजन के साथ आरंभ हो गया है जिसमे कैकेई वरदान,रामवनगमन, खरदूषण वध एवम सुफनखा की नाक काटने की लीला के पश्चात पंचम दिवस लखनाखेड़ा पंचवटी में राम सुग्रीव मित्रता एवम बालि वध के पश्चात लंका जाकर श्री राम भक्त हनुमान जी द्वारा लंका दहन की लीला का मंचन हुआ एवम चलाए मान पुतले के माध्यम से सुंदर लीला का मंचन भी हुआ रात रामायण प्रसंगों पर आधारित राम-सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध की लीला का मंचन किया गया। लीला में दर्शाया गया कि जब सीता की खोज में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वन-वन विचरण करते हुए किष्किंधा पर्वत पर पहुंचे तो उनकी भेंट सुग्रीव से होती है। सुग्रीव राम को अपना दुखद वृतांत सुनाते हैं और बताते हैं कि किस प्रकार उनके भाई बाली ने उन्हें किष्किंधा से निकाल दिया। सुग्रीव की व्यथा सुनकर भगवान राम उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन देते हैं। लीला में बाली वध का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बाली के वध के बाद श्रीराम सुग्रीव को किष्किंधा का राजा घोषित करते हैं। इस मौके पर भारी भीड़ देखने को मिली। छटवे दिवस चूड़ामणि लीला एवम सीता जी की खोज लीला का मंचन होगा और मूल मेला 8 अक्टूबर निकासी वा 9 अक्तूबर राम रावण युद्ध के साथ सम्पन्न होगा जिसे देखने के लिए लाखो की संख्या में भीड़ उमड़ती है वही मेला कमेटी एवम पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा

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