जनपद में खनन माफियाओं का दबदबा हर सरकार में देखने को मिलता रहा है। बसपा, सपा या भाजपा—किसी भी सरकार में इनकी पकड़ इतनी मजबूत हो जाती है कि अधिकारी भी कार्रवाई से कतराते दिखते हैं। नतीजा यह है कि माफिया खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न सिर्फ राजस्व चोरी कर रहे हैं बल्कि आम लोगों को भी परेशान कर रहे हैं।
असोथर थाना क्षेत्र के कठौता–लक्ष्मण कुटी रोड पर मोरम के दो डंप और असोथर–जरौली मार्ग स्थित सिंघूतारा गांव में बड़े पैमाने पर डंप संचालित किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इन डंपों से मोरम बिना रायल्टी के एनआर में बेची जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रति बैकेट लगभग 200 रुपये कम दर पर बिक्री हो रही है, जिससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
लगातार ओवरलोडिंग और बरसात की वजह से असोथर–कठौता मार्ग दलदल में बदल चुका है। इस मार्ग से कठौता, बदलेवा, दरियावपुर, मैकुवापुर, देशी का डेरा, महादेव सिंह का डेरा, लक्ष्मणपुर, सैबसी सहित अन्य गांवों के ग्रामीण और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे रोजाना गुजरते हैं। लेकिन सड़क की खस्ताहाल स्थिति के चलते लोगों का आना-जाना दूभर हो गया है।
गांव के निवासी ओमप्रकाश निषाद ने कहा, “सड़क पर चलना अब नामुमकिन हो गया है। कई बार हम लोग कीचड़ में गिरकर चोट खा चुके हैं। प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है।”
वहीं कक्षा 8 की छात्रा पूर्वी ने बताया, “हम लोग स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। रोज जूते-चप्पल कीचड़ में धंस जाते हैं। मजबूरन कई बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है।”
ग्रामीणों का कहना है कि खनिज, परिवहन और पुलिस विभाग की मिलीभगत से ही माफियाओं का यह खेल फल-फूल रहा है। सवाल यह है कि सरकार को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले इस खेल पर आखिर कब तक आंखें मूंदे बैठे रहेंगे जिम्मेदार अधिकारी?
शेखर सिद्दीकी ब्यूरो चीफ फतेहपुर की रिपोर्ट
