नैनीताल। उत्तराखंड रोडवेज में काम कर रहे एक कर्मचारी ने समय पर वेतन न मिलने से परेशान होकर अपनी नौकरी छोड़ दी। आर्थिक तंगी और परिवार की जिम्मेदारियों के दबाव में उन्होंने यह कठिन फैसला लिया। नौकरी छोड़ने के बाद अब वह अपने गांव लौट चुके हैं और खेती-बाड़ी कर आत्मनिर्भर जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं।
कर्मचारी का कहना है कि रोडवेज में लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद कई महीनों तक वेतन नहीं मिला। कई बार अधिकारियों से संपर्क करने और शिकायत करने के बाद भी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला। ऐसे में उनके लिए नौकरी जारी रखना मुश्किल होता चला गया।
वेतन न मिलने से बढ़ी आर्थिक परेशानी
पीड़ित कर्मचारी ने बताया कि समय पर सैलरी न मिलने के कारण घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया था। सरकारी विभाग में काम करने के बावजूद वेतन न मिलना मानसिक तनाव का कारण बन गया।
नौकरी छोड़ गांव लौटने का फैसला
लगातार अनदेखी और आर्थिक संकट से तंग आकर उन्होंने उत्तराखंड रोडवेज की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद वह अपने पैतृक गांव लौट आए, जहां पहले से मौजूद जमीन पर खेती शुरू की। शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन धीरे-धीरे हालात बेहतर हो रहे हैं।
खेती में दिख रहा भविष्य
अब वह परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेती से भले ही आय धीरे-धीरे होती है, लेकिन इसमें आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और मानसिक शांति मिलती है।
युवाओं के लिए संदेश
पूर्व रोडवेज कर्मचारी का मानना है कि अगर नौकरी में असुरक्षा और शोषण हो, तो गांव लौटकर खेती या स्वरोजगार जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। सही मेहनत और योजना से कृषि भी रोजगार का मजबूत साधन बन सकती है।

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