ऐसे होगी सनातन धर्म की श्रेष्ठता व विश्वगुरु भारत का उद्घोष :- संत रामपाल जी महाराज

बीते रविवार 24 सितंबर को छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार भाटापारा जिले में एक आध्यात्मिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन हुआ तहसील कसडोल स्थित देवरी कला गांव के एक भवन में संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

सत्संग कार्यक्रम की खास बात यह रही कि वहां उपस्थित संत रामपाल जी महाराज के सैकड़ो अनुयायियों में से कोई भी अनुयायी नशा नहीं करता और ना ही मांस का सेवन करता है, उपस्थित अनुयायियों ने बताया की संत जी से दीक्षा प्राप्त करने के लिए आजीवन कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है जिनमें से मुख्य नियम हैं नशा न करना, मांस भक्षण न करना,दहेज लेना व देना,व्यभिचारी,चोरी,घुसखोरी कन्या भ्रूण हत्या व मरिया भात परंपरा से पूर्णतया दूर रहना है, पूरे भारत तथा अन्य देशों में भी संत रामपाल जी महाराज जी की लाखों की संख्या में अनुयाई है जो इन सभी कुरीतियों से कोसों दूर है तथा इनका समूल नाश करने हेतु प्रतिबद्ध हैं,

उनका कहना था कि श्रीमद् भागवत गीता अध्याय नंबर 16 के श्लोक नंबर 23 में लिखा है की जो साधक शास्त्र विधि को त्याग कर मनमाना आचरण करता है वह ना तो सुख को प्राप्त होता है ना ही कोई सिद्धि को और ना ही परम गति को प्राप्त होता है अर्थात ऐसी साधनाएं व्यर्थ कही गई हैं,अनुयायियों के अनुसार संत रामपाल जी ही एक मात्र संत है जो संपूर्ण साधनाएं व भक्ति विधि शास्त्र के अनुकूल बताते हैं जिनसे उन्हें लाभ मिलता है व उस परमधाम यानी सतलोक की भी प्राप्ति होगी जहां जाने के बाद साधक जन्म – मृत्यु के घेरे से बाहर निकल जाता है।

संत जी व उनके अनुयायियों के द्वारा गांव-गांव व शहर-शहर में ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन आए दिन होते रहते हैं जिससे कि आम जनमानस में भी आध्यात्मिक क्रांति लाई जा सके तथा भारत में पुनः सनातन धर्म की श्रेष्ठता व विश्व गुरु भारत का उद्घोष हो सके।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बलौदा बाजार भाटापारा जिले के सभी संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयाई एवं रामखिलावन, मोहन पटेल, दिनदयाल पटेल , ओंकार पटेल कृष देवागन,अजय दिवाकर, गुमान साहू मौजूद थे ।

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