कांग्रेस के जाने-माने नेता और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ पदयात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य प्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपियों के खिलाफ उचित कार्यवाही न करना है। सचिन पायलट ने इस मुद्दे को लेकर अपनी सरकार पर ही हमला बोल रखा है। उनका सीएम गहलोत के साथ पहले से ही 36 का आँकड़ा चल रहा है। जनसंघर्ष पदयात्रा में पत्रकार वार्ता के दौरान पायलट ने कहा कि भ्रष्टाचार तो हर जगह व्याप्त है , लेकिन मायने यह रखता है कि आप इसको कम या खत्म करने के लिए क्या कर रहे हैं ? पेपर लीक के एक मामले को लेकर उन्होंने कहा कि जाँच से पहले ही इस मामले में यह तय कर घोषित कर दिया गया कि इसमें न कोई नेता और न ही कोई अधिकारी शामिल है। अब ऐसा ही करना है तो जाँच की प्रक्रिया बना किस लिए रखी है ? मौसम समय के हिसाब से काफी गर्म चल रहा है। मई का महीना है। सचिन पायलट से जब गर्मी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि गर्मी तो पड़ ही रही है। मई का महीना चल रहा है। लोग हमारे साथ सड़क पर निकल रहे हैं। इससे यही साबित होता है कि मेरे द्वारा उठाए गए मुद्दे प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि हमें भ्रष्टाचार के मुद्दों एवं युवाओं के भविष्य से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। सरकार हमारी ही पार्टी की है तो यही उम्मीद करते हैं कि हमारी बात सुनी जाएगी।
राजस्थान में सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। यह पहले से और आगे निकल गया है। दोनों ही पार्टी के शीर्ष नेता हैं और इसलिए दोनों के बीच की तकरार चर्चा का विषय बनी हुई है। पायलट की स्थिति सत्ता के वनवासी वाली चल रही है। सचिन पायलट 2018 में राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं तथा बाद में उपमुख्यमंत्री भी रहे हैं और वह अपनी ही सरकार की भ्रष्टाचारी गतिविधियों के खिलाफ बुलंदी से डटे हुए हैं। पार्टी को पता है कि दोनों ही नेता सत्ता में वापसी के लिए जरूरी हैं। दोनों के बीच तालमेल की वापसी भी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सरकार को आगामी चुनाव में असफलता का मुँह देखना पड़ सकता है।
