महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बारसू रिफाइनरी के विषय पर शिवसेना नेता संजय राऊत ने एक बयान दिया है। संजय राउत ने अपने बयान में एक आरोप लगाया है। संजय रावत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की कार्यशैली में इस मामले को लेकर समन्वय नहीं है। राज्य सरकार के अधिकारी इस मामले के विषय में मुख्यमंत्री तक गलत जानकारी पहुँचा रहे हैं। लोग इस मामले को लेकर उग्रता के साथ आंदोलन कर रहे हैं और सड़कों पर हैं तो इस स्थिति को देखकर ही सरकार को समझ जाना चाहिए। संजय राउत ने आगे कहा कि किसी के बीच समन्वय नहीं है। इस रिफाइनरी के पीछे एक इस्लामिक कंपनी है जो सऊदी अरब की है और उसके लिए मराठा आंदोलनकारियों पर सरकार द्वारा लाठीचार्ज किया जा रहा है। क्या यही इनका हिंदुत्व है ? एक हिंदूवादी सरकार के दौर में यह ठीक नहीं हो रहा है। उन्होंने बारसू रिफाइनरी के मुद्दे पर रत्नागिरी के जिलाधिकारी पर गलत जानकारी पहुँचाने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की माँग की है। संजय राऊत ने आगे की बात में कहा कि बारसू रिफाइनरी परियोजना वहाँ जमीन खरीदने वाले नेताओं और बाहरी लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए शुरू की गई है। उन्होंने माँग की कि ऐसे लोगों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने शरद पवार की बात को लेकर भी टिप्पणी की जिसमें शरद पवार ने कहा था कि इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लोगों से बातचीत की जाएगी और उन्हें भरोसे में लिया जाएगा। राऊत ने कहा कि उन लोगों को सरकार पर भरोसा नहीं है‌। दरअसल इस मामले को लेकर शरद पवार ने स्थानीय लोगों से बातचीत के माध्यम से समस्या समाधान की बात कही थी और अगर ऐसा नहीं होता है तो रिफाइनरी के लिए वैकल्पिक जगह को ढूँढने की भी बात शरद पवार ने कही थी। संजय राउत ने जंतर मंतर पर पहलवानों के विरोध प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभी की स्थिति को समझते हुए आगे मामला अगर सुप्रीम कोर्ट में जाता है तो सरकार को आगे सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मानना होगा।

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