महात्मा गाँधी के पौत्र अरुण गाँधी का मंगलवार की सुबह लंबी बीमारी के चलते 89 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। अरुण गाँधी के बेटे तुषार ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार कोल्हापुर में किया जाएगा। अरुण गाँधी ने “कस्तूरबा – द फॉरगेट वुमन” और “ग्रैंडफादर गाँधी” जैसी कई किताबें लिखी थीं। अरुण गाँधी का जन्म 1934 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। अरुण भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के पाँचवें पौत्र थे। दक्षिण अफ्रीका में रहने के दौरान अरुण के साथ भी कई बार भेदभाव जैसी गतिविधियाँ हुई थीं। arungandhi.net नामक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका के कई गोरे लोगों ने उन्हें कई बार रंगभेद का शिकार बनाया था। इस घटना में अफ्रीका के काले लोग भी गोरों का साथ दिया करते थे। एक बार अरूण गाँधी के साथ दक्षिण अफ्रीका में मारपीट और हिंसात्मक गतिविधि की गई थी जिसके बाद उन्होंने बदला लेने का मन बनाया लेकिन जब उन्होंने अपने माता-पिता और दादा-दादी के बारे में सोचा तो उन्होंने सीखा कि किसी भी व्यक्ति को अपने प्रेम और कष्ट सहने के भाव से बदलना चाहिए। महात्मा गाँधी ने अरुण गाँधी को हिंसा के बजाय अहिंसा को अपना हथियार बनाने की सीख दी। अरूण गाँधी ने बताया कि एक बार महात्मा गाँधी ने उन्हें दुनिया में हो रही शारीरिक हिंसा का कारण बताया जिसमें कि लोग एक दूसरे के बारे में बिना जाने ही एक दूसरे के प्रति कितनी अघोषित शारीरिक हिंसा करते हैं। अरूण गाँधी की बायोग्राफी से पता चलता है कि उन्होंने अपने दादा महात्मा गाँधी से हिंसा और गुस्से को नियंत्रित करने के संबंध में काफी कुछ सीखा। अरूण गाँधी काफी सामाजिक काम करते थे तथा वे लेखन का कार्य भी करते थे‌‌। उन्होंने अपनी पत्नी सुनंदा से शादी के कुछ समय बाद ही दक्षिण अफ्रीका छोड़ दिया था। अरुण गाँधी ने करीब 30 सालों तक एक बड़े अखबार के साथ काम किया‌। अरूण गाँधी और उनकी पत्नी सुनंदा ने महाराष्ट्र में करीब 125 बच्चों को बचाया तथा पश्चिम महाराष्ट्र में कई गाँवों के मराठी लोगों की मदद की।

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