दिल्ली आबकारी घोटाला मामला सियासी घमासान का मुद्दा बना हुआ है। एक ओर इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान घोटाले के संबंध में जानकारियाँ मिलती जा रही हैं तथा एक – एक करके राज बाहर आ रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट और राउज एवेन्यू कोर्ट में यह मुद्दा लगातार सुना जा रहा है। बुधवार की सुनवाई में मनीष सिसौदिया द्वारा मोबाइल फोन नष्ट करने व कोर्ट से फाइल गायब होने के मुद्दे पर भी बात हुई। इस मामले पर चल रही सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया सिसौदिया ने मोबाइल कब नष्ट किए ? सीबीआई ने बताया कि जिस दिन मामला एलजी ने हमें सौंपा , उसी दिन सिसौदिया ने फोन नष्ट कर दिया। सिसौदिया की जमानत याचिका के विरोध में सीबीआई ने कहा कि सिसौदिया गिरफ्तारी से पहले भी पदीय जिम्मेदारी निभा रहे थे। एलजी द्वारा सीबीआई को केस सौंपने पर उन्होंने अपने मोबाइल नष्ट किए। सीबीआई की तरफ से पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एक अहम दस्तावेज गायब हो गया और वह शायद इसलिए गायब हुआ है क्योंकि उसमें दिल्ली सरकार के खिलाफ अहम सबूत थे। इसलिए सीबीआई द्वारा बार – बार पूछने पर भी सिसौदिया ने कुछ नहीं बताया। इसलिए 26 फरवरी 2021-22 के आबकारी घोटाले के तहत सिसौदिया को गिरफ्तार किया गया। जस्टिस दिनेश शर्मा ने दलीलें सुनने के बाद मामले को 11 मई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। सीबीआई ने बताया कि दस्तावेज को या तो नष्ट किया गया है या फिर गायब किया गया है। हम यह साबित कर सकते हैं कि आखिरी बार यह पत्ररूपी दस्तावेज सिसौदिया के पास था। सिसौदिया मंत्री थे और सत्ता में थे तथा उनके द्वारा इस बात का गलत इस्तेमाल किया गया। 10 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की तथा सिसौदिया के खिलाफ पाँचवी चार्जशीट पर विचार हेतु सुनवाई को 19 मई तक स्थगित कर दिया। 06 मई की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि सिसौदिया की देखरेख की गतिविधियों के कारण कुल 622 करोड़ रूपए की आपराधिक आय अर्जित की गई। सिसौदिया इस घोटाले का केंद्र बिंदु हैं तथा उन्होंने कमिशन हासिल करने की सोच के कारण आबकारी नीति सहयोगियों के साथ साझा की।
