शंघाई सहयोग संगठन की बैठक अगले महीने नई दिल्ली में होगी जिसमें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भी आने वाले हैं। इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री का भारतीय विदेश मंत्री से भी सामना होगा। इससे पूर्व पनामा के दौरे पर गए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सख्त लहजे में संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने यहाँ से आतंकवाद को खत्म करना होगा तभी भारत पड़ोसी के साथ सही संबंधों को तवज्जो देगा। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद ऐसा लग रहा है कि वह भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है। बिलावल भुट्टो का शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में आने का कारण यह भी हो सकता है। उनके पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तो पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तान अपना सबक सीख चुका है। हमें उम्मीद है कि बिलावल इस दौरे के बाद कई उम्मीद लेकर लौटेंगे। लेकिन इस बैठक से पहले ही भारतीय विदेश मंत्री ने स्पष्ट कह दिया है कि आतंकवाद और सुलभ संबंध एक साथ नहीं चल सकते। पनामा में पत्रकारों से वार्ता करते समय एस जयशंकर ने कहा कि हमारे लिए ऐसे पड़ोसी से जुड़ना कठिन है जो आतंकवाद को प्रोत्साहित करता है। हमने हमेशा कहा है कि अगर हमारा पड़ोसी आतंकवाद को बढ़ावा देना और प्रोत्साहन देना बंद कर देगा तो संबंधों के सुधार पर विचार किया जाएगा। जय शंकर की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले सप्ताह ही लश्कर-ए-तैयबा के जिम्मेदारी लेने वाले एक संगठन ने सेना के एक वाहन पर हमला कर दिया था जिसमें कि हमारे 5 जवान शहीद हो गए थे। यह घटना उस समय की है जब पाकिस्तान द्वारा यह घोषणा की गई थी कि अगले महीने बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भारत , एससीओ की मीटिंग में जाएगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में बार-बार कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को सुरक्षित पनाह देता है और पाकिस्तान को अगर हमारी “पड़ोसी प्रथम” की नीति के दायरे में आना है तो आतंकवाद को खत्म करना होगा। अच्छे संबंध आतंकवाद और हिंसा से मुक्त माहौल में ही संभव हैं।

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