दरासल आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के अध्यक्ष ललित मोदी के खिलाफ दी गई टिप्पणी के मामले में फैसले के बारे में निर्णय दिया है। उन्होंने पिछले सप्ताह ललित मोदी से उनकी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने उन्हें चेतावनी दी है कि ऐसे आचरण से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। और इस तरह के असंगठित आचरण से वे खुद को और भी बड़ी समस्याओं में डाल सकते हैं पीठ ने मोदी को उनकी टिप्पणी के लिए फटकार लगाते हुए उन्हें चेतावनी दी कि इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति के गंभीर परिणाम होंगे। ललित मोदी ने इसके बाद मंगलवार को सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ दी गई टिप्पणी के लिए माफी मांगी है।……..उन्होंने ने कहा, मैं 13 जनवरी के सोशल मीडिया पोस्ट और 30 मार्च के ट्वीट के लिए बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूं। मेरे मन में भारतीय न्यायिक प्रणाली और न्यायालयों के लिए बहुत ही ज्यादा सम्मान है। मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा जो न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाए…………..वही सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ललित मोदी को न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। अपको बता दे की , जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने मोदी को उनकी टिप्पणी के लिए फटकार लगाते हुए उन्हें चेतावनी दी कि इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति के गंभीर परिणाम होंगे।…….और हलफनामे में जो कुछ भी लिखा गया था उससे संतुष्ट नहीं है है न्यायपालिका…..अपको बता दे की ,पीठ ने कहा था कि मोदी कानून और संस्था से ऊपर नहीं हैं। और उन्हें माफी मांगने से पहले भारतीय न्यायपालिका की छवि को खराब न करने वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर भविष्य में पोस्ट नहीं करने की शपथ के साथ एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया था। और पीठ ने मामले की सुनवाई 24 अप्रैल के लिए स्थगित करते हुए कहा कि अदालत ने मोदी की ओर से दायर जवाबी हलफनामे का अध्ययन किया है। …….और उस हलफनामे में जो कुछ भी बताया गया था वो स्पष्ट नहीं था आपको बता दे की ,,न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले मोदी के ट्वीट पर वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें न्यायाधीशों के खिलाफ निंदनीय टिप्पणी की गई थी।……….अपको बात दे की ,,,ललित मोदी ने एक केवल,, यह स्पष्ट करने के लिए ट्वीट में किया था कि यह दलाल झूठ फैलाकर भारत और इसकी न्यायपालिका को बदनाम करते हैं। वे दिखावे के अलावा और कुछ नहीं कर सकते और फिक्सिंग के लिए पैसे की मांग करते हैं। …………….ऐसी ही ताजा न्यूज़ अपडेट पाने के लिए जुड़े रहिए हमारे ई – इंडिया न्यूज़ के साथ ……………….

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