सुप्रीम कोर्ट ने धनशोधन एवं रोकथाम अधिनियम पर सुनवाई स्थगित करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को अंतरिम राहत दी है। मामले के एक बिंदु के अंतर्गत ही राज्य में नौकरियों में 58% आरक्षण को जारी रखने की बात की गई है। पिछले साल सितंबर में हाईकोर्ट ने इसे 50% सीमा के बाहर बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद सरकार ने इसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में की जिसे सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी। कानून वर्ष 2011 में पारित हुआ था जिसमें कि छत्तीसगढ़ में 32% ST , 12% SC और 14% OBC आरक्षण की बात की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को इसमें अंतरिम राहत दे दी है और व्यवस्था को जारी रखने की ओर इशारा किया। मामले में उस याचिका की सुनवाई को आगे बढ़ाया गया है जिसमें धनशोधन एवं रोकथाम अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। छत्तीसगढ़ धनशोधन एवं रोकथाम अधिनियम को चुनौती देने वाला पहला राज्य बन गया है। इससे पूर्व कई निजी क्षेत्र के लोगों द्वारा इस कानून के खिलाफ सुनवाई की माँग की गई थी लेकिन पिछले साल एक सुनवाई में शीर्ष अदालत की तीन जजों की एक पीठ ने इसकी वैधता को कायम रखा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य के अधिकारियों और निवासियों से इस कानून के संबंध में शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में कहा गया कि ईडी जैसी एजेंसियों द्वारा हमें परेशान किया जाता है।‌ अधिकारों के इन दुरूपयोग के कारण ही छत्तीसगढ़ सरकार को कोर्ट में आना पड़ा है। इसमें मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी व वकील सुमीर सोढ़ी ने अपील की थी कि इस मामले की संवैधानिकता के लिहाज से इस पर जल्द से जल्द ध्यान दिया जाये।

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