कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा कालियागंज की घटना को लेकर सरकार से गुरुवार को रिपोर्ट मांगी गई है। जस्टिस राजशेखर मंथा ने सरकार को कहा है कि अगले मंगलवार तक सरकार अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे और रिपोर्ट के साथ ही यह भी बताया जाए कि इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए ? साथ ही मामले की जाँच की वीडियोग्राफी को सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। जज ने एफआईआर और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट परिवार को देने की बात कही है। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी पुलिस प्रशासन से रिपोर्ट और संबंधित कागज माँगने का अधिकार दिया गया है। प्रशासन से कहा गया है कि इस हेतु आयोग का सहयोग करें। जस्टिस मंथा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार रेप के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। शरीर में जहर की पुष्टि हुई है। इस मामले में एक 17 वर्षीय लड़की के लापता होने की सूचना थी जिसका शव गत शुक्रवार को कालियागंज की एक नहर में मिला था। इस घटना के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियाँ होने लगीं। परिवार द्वारा यह आरोप लगाया गया कि शव की बरामदगी के बाद पुलिस ने कई मीटर तक शव को सड़क पर ही घसीटा था। इसके बाद करीब 4 एएसआई रैंक के पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। लड़की के परिवार ने आरोप लगाया है कि लड़की के साथ पहले रेप किया गया और उसके बाद उसे मार दिया गया। परिवार के द्वारा आरोप लगाए गए 20 वर्षीय युवक और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। ऐसे संवेदनशील मामले पर भी राजनीतिक लोग बाज नहीं आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक – दूसरे पर आरोप बाजी कर रही हैं। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि इस घटना के बाद कालियागंज क्षेत्र में हुई हिंसक गतिविधियों के पीछे बीजेपी का हाथ है। उन्होंने ही यहाँ पर स्थानीय रूप से हिंसा को भड़कवाया है। इसके विपरीत मुख्यमंत्री के इन आरोपों को बीजेपी ने बेबुनियाद करार दिया है।
