हाल ही में गोवा में शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी जिसमें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भी आए थे। बिलावल भुट्टो ने अपने एक वक्तव्य में अपनी भारत यात्रा को सफल बताया है। बिलावल भुट्टो से प्रेस कॉन्फ्रेंस में यात्रा संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत यात्रा इसलिए सफल रही क्योंकि हम इससे यह साबित कर पाए कि हर मुसलमान आतंकवादी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने इस मिथक को तोड़ने की भरपूर कोशिश की है। भारत के साथ बातचीत के मुद्दे पर बिलावल भुट्टो ने कहा कि सबसे पहले भारत को कश्मीर का पुराना दर्जा बहाल करना चाहिए और बातचीत का माहौल तैयार करना चाहिए। चीन – पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के ऊपर उन्होंने कहा कि केवल भारत इसके खिलाफ है। मध्य एशिया के देश इसके पक्ष में हैं। बिलावल भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान बातचीत के लिए सबसे पहले कश्मीर का 5 अगस्त 2019 से पहले का दर्जा वापस चाहता है। भारत को छोड़कर सभी संबंधित देशों ने सीपीईसी की प्रशंसा की है। बिलावल भुट्टो से जब पाकिस्तान क्रिकेट टीम के भारत में होने वाले वर्ल्ड कप में शामिल होने के लिए पूछा गया तो उन्होंने कहा कि क्रिकेट को कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और उम्मीद है कि वर्तमान स्थिति में ऐसा नहीं होगा। खेल और राजनीति को अलग अलग रखना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने मार्च में ही क्रिकेट को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा था कि टूर्नामेंट तो होते रहते हैं , लेकिन आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि अभी पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंध स्थापित नहीं होंगे और इसमें सरकार की नीति स्पष्ट है। कोई हमारे सिर पर बंदूक रखकर बात करेगा तो यह संभव नहीं है। कश्मीर में जी-20 की बैठक को लेकर बिलावल ने कहा कि हम इसकी निंदा करते हैं और समय आने पर याद रखे जाने वाला जवाब दिया जाएगा। इस निर्णय में घमंड दिखाई देता है , जैसे कि अंतरराष्ट्रीय कानून संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव और द्विपक्षीय समझौतों की कोई चिंता ही न हो। बिलावल की इस टिप्पणी पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान का G-20 और श्रीनगर से कोई संबंध नहीं है। मुख्य मुद्दा पाकिस्तान द्वारा कब्जाया हुआ कश्मीर है। अब सवाल यही है कि पाकिस्तान उस कश्मीर को कब खाली कर रहा है ? अनुच्छेद 370 को लेकर जयशंकर ने कहा कि जागिए और हालात का जायजा लीजिए। अनुच्छेद 370 अब इतिहास हो चुका है और इस सत्य को जितनी जल्दी स्वीकार लिया जाए , उतना अच्छा होगा।

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