देश में नकली दवाइयों का व्यापार बहुत बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश में बनने वाली नकली दवाइयों को देश के अन्य हिस्सों पश्चिम बंगाल , उड़ीसा, बिहार , आंध्र प्रदेश आदि तक पहुँचाया जा रहा है। सप्लाई के इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए एसटीएफ और एफएसडीए ने कमर कस ली है। एसटीएफ की टीम ने बनारस , लखनऊ और आगरा क्षेत्र के कई व्यापारियों को अपनी रडार पर लिया है। इन नकली दवाइयों के सप्लाई के कारोबार में मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य तरह की डिग्री धारक कई लोग शामिल हैं। जानकारी के अनुसार करीब 80 हजार थोक विक्रेता और 1 लाख 6 हजार फुटकर विक्रेता इस नकली दवाइयों के कारोबार में शामिल हैं। यह दवाइयाँ लोगों के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकती हैं। इस तरह के कारोबार में ज्यादातर दवाइयाँ कैंसर रोग आदि संबंधी बताई जा रही हैं। अन्य तरह की दवाइयों में गठिया रोग , संक्रमण , इम्युनिटी संबंधी दवाइयाँ भी हैं और कुछ गर्भपात तथा फेफड़े रोग संबंधित दवाइयाँ भी बताई गई हैं। एसटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त कार्यवाही में पहले भी और ताज़ा खबरों के अनुसार कई बड़े खुलासे हुए हैं जिसमें कि नकली दवाई निर्माताओं द्वारा नामचीन कंपनियों से मिलते जुलते नाम रखकर दवाइयों का निर्माण करना शामिल है। नामचीन कंपनियों जैसे नाम रखने से दवाइयाँ जल्दी बिकती हैं और इन को मुख्य दवाई के दाम से 10 से 20 रूपए कम में बेचा जाता है। सस्ती होने के कारण इन दवाओं का कारोबार लगभग प्रतिदिन 50 करोड़ के करीब हो रहा है। पिछले वर्ष नवंबर – दिसंबर के समय पर नोएडा में भी एक नकली दवा निर्माता कंपनी पर कार्रवाई की गई थी। वाराणसी में भी एसटीएफ के एडिशनल एसपी के नेतृत्व में करीब 7 करोड रुपए की नकली दवाइयाँ बरामद की गई थीं। बनारस में लगातार नकली दवाईयों के कारोबार से जुड़े लोगों को पकड़ा जाता रहा है। हाल ही में करीब 5 लोगों को वहाँ से गिरफ्तार किया गया है जो अपने यहाँ दवाइयों को स्टोर कर अन्य राज्यों में सप्लाई करते थे। इस मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों के क्रम में मिली सूचना के अनुसार करीब 17 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

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