वैज्ञानिक प्रदीप एम कुरूलकर को उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया गया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के इस वैज्ञानिक पर पाकिस्तान को गुप्त सूचनाएँ पहुँचाने का आरोप सिद्ध हुआ है। डीआरडीओ को सूचनाओं तक जासूसी पहुँच और उनके पाकिस्तान संबंध की जाँच के लिए कहा गया था। जाँच के बाद यह सच सामने आने के बाद यह कार्यवाही की गई। वहीं मामला अदालत में जाने पर अदालत ने आदेश देते हुए वैज्ञानिक को एटीएस की हिरासत में भेज दिया। वैज्ञानिक की यह हरकत देश की सुरक्षा के लिहाज़ से काफी संवेदनशील थी। डीआरडीओ के एक अधिकारी ने बताया कि इस गतिविधि की लिंक मिलते ही आदेश के अनुसार गहनता से जाँच की गई जिसमें यह साबित हो गया कि वह ग़लत लोगों के सम्पर्क में थे तथा संवेदनशील दस्तावेज और सूचनाएँ उन तक पहुँचा रहे थे। यह पता चलते ही वैज्ञानिक को प्रयोगशाला निदेशक के पद से हटा दिया गया‌। एटीएस जैसी एजेंसियों को वैज्ञानिक के खिलाफ इस तरह की सूचना मिलते ही डीआरडीओ को इस संबंध में निर्देशित किया गया। मामले को सीधे इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट से संबद्ध किया गया। दरअसल यह मामला हनीट्रेप से संबंधित है जिसमें कि वैज्ञानिक 2022 से ही पाकिस्तानी एजेंट के सम्पर्क में था। लगातार उनकी एजेंट के साथ बातचीत जारी थी। कुरूलकर को संवेदनशील दस्तावेजों के साथ पुणे में महाराष्ट्र एटीएस ने गिरफ्तार किया। कुरूलकर को पाकिस्तानी महिला एजेंट द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से सम्पर्क किया गया था। दोनों के बीच लगातार चैट और वीडियो कॉल हुआ करती थीं। यह बात खुद कुरूलकर ने भी स्वीकारी है कि दोनों आपस में वीडियो कॉल किया करते थे। एटीएस ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि अधिकारी वैज्ञानिक द्वारा अपने पद का गलत उपयोग किया गया तथा उन्होंने देश की सुरक्षा के साथ समझौता किया है‌। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत एटीएस की मुंबई कलाचौकी इकाई में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जाँच लगातार जारी है।

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