
कर्नाटक में अचानक से सरकारी अधिकारियों और नेताओं के घर छापेमारी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके पीछे का कारण राज्य लोकायुक्त का कार्यालय है। लोकायुक्त के अधिकारियों ने सोमवार को कई जगहों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान के पीछे का कारण कई लोगों की आय से अधिक संपत्ति के मामलों को माना जा रहा है। इसके एक मामले में लोकायुक्त अधिकारियों ने बेंगलुरु के येलहंका महानगरपालिका के इलाके में एडीजीपी के आवास पर छापेमारी की। लोकायुक्त कार्यालय के से मिली जानकारी के अनुसार दावणगेरे , बेल्लारी , बीदर , कोलार आदि जिलों में भी छापेमारी की प्रक्रिया चल रही है। एडीजीपी गंगाधरैया के आवास पर तलाशी लगातार जारी है। येलहंका और महालक्ष्मी लेआउट इलाके में उनके आवासों पर 15 अधिकारियों की एक टीम ने उनके आवास पर छापेमारी की। इस टीम का नेतृत्व एक एसपी और एक डिप्टी एसपी तथा एक इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। लोकायुक्त एसपी उमेश के नेतृत्व में जाँच अधिकारियों ने कोलार क्षेत्र के तालुक पंचायत के सीईओ एन वेंकटेशप्पा के कई स्थानों पर संपत्ति की तलाशी ली। बेल्लारी और बेंगलुरु स्थित एक अधिकारी हुसैन साब के आवासों पर भी छापेमारी की जा रही है। बसवकल्याण के बीदर , मुदुबी के आनंदनगर में उपतहसीलदार को भी छापेमारी की प्रक्रिया के दायरे में लाया गया है। कर्नाटक के साथ – साथ आयकर विभाग ने तमिलनाडु राज्य में भी कई स्थानों पर छापेमारी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। तमिलनाडु के अन्ना नगर इलाके में एक जगह तथा DMK विधायक एम.के. मोहन के बेटे कार्तिक के घर पर भी आईटी की विभागीय छापेमारी की गई है। इसके विरोध में DMK के कार्यकर्ता एकजुट हुए और उनके घर के बाहर इस कार्यवाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
